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खौफनाक वो 17 दिन, कैसे कटी रातें पढ़े पूरी खबर…

डेस्क। पूरी दुनिया की नजरें एक टक टिकी हुई थी। हर पल जान का खतरा मंडरा रहा था। उसके बाद भी जिंदा रहने की एक उम्मीद बाकि थी। इसी उम्मीद की वजह से वे सभी 17 दिन भूखे प्यासे बस अपनी जान की दुआ मांगते रहे। उन बच्चो की उम्मीदों के साथ ही पूरा विश्व उनकी जान की दुआ मांगने के लिए हाथ फैलाए हुए था। थाईलैंड की वाइल्ड बोर्स अंडर-16 फुटबाल टीम ने तय किया था कि प्रैक्टिस मैच के बाद वो टैम लूंग गुफा देखने जाएंगे। मैच खत्म हुआ और टीम के 12 खिलाड़ी और उनके कोच तय प्रोग्राम के मुताबिक गुफा तक पहुंच गए। इसके बाद एक-एक कर सभी बच्चे करीब दस किलोमीटर लंबी गुफा में दाखिल होने लगते हैं। तब मौसम बिल्कुल साफ था।
इधर बच्चे गुफा में दाखिल होते हैं उधर मौसम का मिज़ाज अचानक बदल जाता है। बाहर के बिगड़े मौसम से बेखबर बच्चे गुफा में लगातार आगे बढ़ रहे थे। ऊबड़ खाबड़ सुरंग से होते हुए फुटबाल टीम सबसे पहले यहां पहुंची। गुफा के मुहाने से करीब 200 मीटर तक का ये रास्ता तब तक पूरी तरह सूखा हुआ था। 200 मीटर के बाद गुफा इतना संकरा हो जाता है कि एक वक्त में एक ही शख्स निकल सकता है। मगर चूंकि बच्चे थे, लिहाज़ा वो इसे आसानी से पार कर गए। अब यहां से आगे का रास्ता जुलाई से लेकर नवंबर यानी बरसात के दौरान तक इतना खतरनाक हो जाता है कि इस गुफा में इस दौरान नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया जाता है। मगर तब पानी ना होने की वजह से बच्चे यहां से भी काफी अंदर तक घुस चुके थे। इस जगह पर आकर गुफा का आकार एक मीटर से भी कम हो जाता है। यानी इसे या तो झुककर या लेट कर ही पार किया जा सकता है। बच्चे इसे भी पार कर गए। हालांकि कुछ दूरी के बाद ये रास्ता फिर चौड़ा हो जाता है। मगर उसके फौरन बाद यानी पटाया बीच के नज़दीक सुरंग की सबसे तंग जगह आती है। उसे भी पार कर लें तो इस जगह पर आकर सुरंग की ऊंचाई करीब 10 मीटर से भी ज़्यादा हो जाती है। बच्चे अब तक गुफा में करीब 4 किमी अंदर तक जा चुके थे। और तभी ठीक उसी वक्त बाहर हो रही तेज बारिश का पानी गुफा में घुसना शुरू हो जाता है।
पानी का लेवल धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा था। अब मुश्किल ये थी कि इस मानसूनी बारिश के पानी के बीच इस गुफा निकलने के लिए वापस इतना लंबा सफर तय किया कैसे जाए। क्योंकि बच्चों को तैरना भी नहीं आता था। निकलने का रास्ता सिर्फ एक और उस पर भी पानी खतरे के निशान से ऊपर आ चुका था। लिहाज़ कोच ने ये तय किया कि जब तक हालात बाहर निकलने लायक नहीं हो जाते हैं, तब तक यहीं रुकेंगे। अब सभी बच्चे एक कोने में दुबक कर पानी उतरने का इंतजार करने लगते हैं। मगर हालात सुधरने के बजाए और खराब होते चले गए। उधर, गुफा के बाहर काफी वक्त बीतने के बाद भी जब बच्चे अपने अपने घर नहीं लौटे तो मां-बाप की भी बेचैनी बढ़नी शुरू हुई। पहले अगल-बगल और फिर मैदान में ढूंढा गया। और जब कुछ पता नहीं चला तो आखिरकार पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
अब तक दो हफ्ते गुज़र चुके थे लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे अभी भी गुफा में ही फंसे हुए थे। थाईलैंड के चियांग राय प्रांत की गुफा के करीब चार किलोमीटर अंदर फंसे बच्चों और उनके कोच को निकालने के लिए थाईलैंड नेवी सील के कमांडो और विदेशी गोताखोरों की टीम ने दिन रात एक कर दिया। एक तरफ रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे लोग बच्चों को सुरक्षित निकालने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे। तो दूसरी तरफ गुफा में फंसे बच्चे के घरवाले दुआएं मांग रहे थे। इसके साथ ही पूरी दुनिया की सांस अटकी हुई थी।
सबसे पहले गुफा के अंदर 2 किमी की दूरी पर इस जगह रेस्क्यू टीम का बेस बनाया गया। जहां ज़रूरी इक्वेपमेंट के साथ दवाएं और खाना स्टोर किया गया। क्योंकि इसके आगे का रास्ता थोड़ा खतरनाक था और यहां गुफा मोड़ भी ले रही है। इस पूरे रास्ते पर भारी बारिश की वजह से काफी गहरे तक पानी भरा हुआ था। जिसे एक अच्छा तैराक ही पार कर सकता था। इसके आगे गुफा का आकार कहीं संकरा तो कहीं चौड़ा है। लिहाज़ा बच्चों को गुफा से निकालने से पहले उन्हें उसी जगह तैराकी की हल्की फुल्की ट्रेनिंग दी गई। ताकि वक्त पड़ने पर वो कम से कम पानी में हाथ पैर तो चला सकें। इसके बाद रविवार को पहली बार चार बच्चों को ऑक्सीज़न कैप्सूल के ज़रिए गुफा से सुऱक्षित बाहर निकाला गया। ये वो चार बच्चे थे जो सबसे ज्यादा कमजोर और बीमार थे।
अंडर-16 फुटबाल टीम के 13 लोगों में से 4 बच्चों के बाहर निकलते ही उम्मीद की रोशनी जगमगा उठी। और अगले रोज यानी सोमवार को चार और बच्चों को निकाल लिया गया। मंगलवार को गोताखोरों और सील कमांडों ने एक बार फिर ऑपरेशन शुरू किया। रेस्क्यू टीम ने जैसा प्लान बनाया था, ठीक वैसा ही हुआ। एक-एक कर बाकी बचे चारों बच्चों और उनके कोच को पानी से भरी अंधेरी गुफा से बाहर निकाल लिया गया। पूरी दुनिया पल पल इस रेस्क्यू ऑपरेशन को देख रही थी। थाईलैंड ही नहीं दुनिया के लिए भी ये जश्न का दिन था। बेहद मुश्किल हालात में सूझबूझ के साथ सभी जिंदगियों को बचा लिया गया। थाईलैंड के चियांग राय प्रांत के थाम लुआंग गुफा में फंसे सभी 13 लोगों के इस मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन की कामयाबी पर थाई नेवी सील्स ने फेसबुक पर लिखा कि हमें नहीं पता कि ये चमत्कार है, विज्ञान है या क्या है? सभी 13 वाइल्ड बोर्स अब गुफा से बाहर हैं।

नेवी गोताखोर समन गुनान की मौत

थाईलैंड की खौफनाक गुफा में जो मिशन नामुमकिन लग रहा था वो आखिरकार कामयाब रहा। 17 दिनों से गुफा में फंसे 12 बच्चों और उनके एक कोच को जब सुरक्षित बाहर निकाला गया तो पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली। थाई नेवी सील्स और 50 गोताखोरों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर बच्चों को तो बचा लिया। मगर इस कोशिश में एक पूर्व नेवी गोताखोर समन गुनान की जान चली गई।

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