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नक्सली हमले की निंदा करने तक सीमित है डॉ रमन सिंह, 3 ब्लाकों से 14 जिलों तक पहुंचे नक्सली

रायपुर। कांकेर जिले के पखांजूर इलाके में नक्सलियों के हमले में सीमा सुरक्षा बल ( बीएसएफ ) के दो जवानों की शहादत पर रोष व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि सिर्फ हमलों की निदा व शहादत पर संवेदना जताने से नहीं माओवाद खत्म नहीं होगा। भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुये प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि 15 सालों से नक्सली हमले के बाद मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह एवं उनकी पूरी सरकार नक्सली हमले की निंदा तीव्र निंदा एवं जवानों की शहादत पर उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने तक सीमित रही है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय सिर्फ 3 ब्लाक नक्सल प्रभावित हुआ करते थे भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र  बढ़कर 14 जिला 3 ब्लाकों से बढ़कर हो गया है। स्वयं मुख्यमंत्री रमन सिंह का गृह जिला कवर्धा माओवाद प्रभावित जिलों की सूची में शामिल हो गया है।

                                          नक्सल समस्या को लेकर रमन सरकार कभी गंभीर नहीं रही है। नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों के नाम से जमकर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करना भाजपा सरकार का मुख्य एजेंडा रहा है। नक्सलियों को भाई बेटा बताने वाले रमन सिंह जी से छत्तीसगढ़ की जनता को कोई उम्मीद नहीं है कि नक्सल समस्या को ये कभी खत्म कर पाएंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि जब-जब विधानसभा चुनाव नजदीक आता है तो नक्सल गतिविधियों अचानक बढ़ जाती हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की शहादत हुई थी। इस नक्सल हमले के पीछे अपराधिक राजनैतिक षडयंत्र की जांच आज तक नहीं हो पाई है।

                                         जीरम हमले के षडयंत्रकारियों को बचाने के लिये उसकी जांच नहीं की जा रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के पहले अचानक नक्सलियों के सक्रियता बढ़ना कहीं ना कहीं किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहा है। नक्सलियों के नाम से भय उत्पन्न कर चुनाव के दौरान मतदान को भी प्रभावित करने की कोशिश से इनकार नहीं किया जा सकता है। रमन सरकार नक्सल मोर्चे पर पूरी तरह से विफल है। 15 सालों में नक्सल समस्या खत्म करने के लिये भाजपा सरकार ना तो किसी प्रकार की वार्ता की गई और कोई ठोस कदम भाजपा सरकार ने अभी तक नहीं उठाए हैं।

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