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आसान नही छत्तीसगढ़ की सत्ता में काबिज होना

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अब सर पर आ गया है। लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ की सत्ता में काबिज होना आसान नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश में अब तक दो पार्टियों के बीच सीधे मुकाबला हो रहा था। लेकिन पिछले 15 सालों से प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम हर बार लहराया है। इस बार की स्थिति कुछ अलग हटकर बनती नजर आ रही है। क्योंकि इस बार विधानसभा चुनाव इतना आसान नहीं होने वाला है। देखा जाए तो पिछले 15 सालों से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी भी इस बार के चुनाव को हलके में नहीं लेना चाहती क्योकि तीसरी पार्टी के रुप में छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने अपनी अच्छी पकड़ बना ली है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इस बार सत्ता में काबिज होने के लिए अपने तमाम दांव धीरे धीरे खोलने शुरु कर दिए है। एक तरफ जहां बीजेपी छत्तीसगढ़ की सत्ता में काबिज होने के लिए बस्तर पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है तो वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इस बार बस्तर में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए पूरी कोशिश में है। तो दूसरी ओर कांग्रेस सभी वर्गों को साधने में लगी हुई है। अभी से अनुमान लगाना शुरु हो गया है कि इस बार प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को सत्ता आसानी से नहीं मिलने वाली है। इस बार आम आदमी पार्टी भी प्रदेश में अपनी जमीन तलाश कर रही है। प्रदेश में अच्छी पकड़ बनाने को लेकर आप के कई विधायक व दिल्ली की सत्ता में मंत्री के रुप में काबिज नेता बस्तर से लेकर सरगुजा तक की दौड़ लगा रहे है, तो वहीं कांग्रेस व छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बसपा के साथ जोड़तोड़ करना शुरु कर चुके है। पिछले विधानसभा चुनाव में जीत के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्तमान कई एेसे विधायक है जो मामूली अंतर से जीत दर्ज किए है। एेसे विधायकों पर पार्टी आलाकमान क्या फैसला लेती है यह तो समय ही बताएगा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में एेसे विधायकों की टिकट पर संशय की स्थिति बनी हुई है। अगर इन मामूली अंतर से जीतने वाले विधायकों की टिकट कटती है तो प्रदेश के दो से तीन मंत्रियों की टिकटों पर भी तलवार लटके साफ देखा जा सकता है जो मामूली अंतर से विधानसभा तक पहुंच पाए है। वहीं इस बार चुनाव को लेकर नए चेहरों को मौका दिए जाने की बात कही जा रही है। अगर इस बार नए चेहरे आते है तो इस चुनावी समर में किस पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा यह तो चुनाव के नतीजे देखने के बाद ही मालूम होंगे। लेकिन नए चेहरों के साथ ही साफ छवि भी सत्ता में काबिज होने के लिए एक बड़ा पत्ता साबित हो सकता है।

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