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नहीं रहे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलराम दास टंडन, बेबाक अंदाज थे ऐसे की अपनी ही सरकार के फैसलों को कर देते थे कटघरे में खड़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पांचवे राज्यपाल के रुप में प्रदेश की बागडोर सम्हालने वाले राज्यपाल बलराम दास टंडन अब हमारे बीच नहीं रहे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। अचानक सुबह उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ जाने के बाद उन्हें रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। राजनीति में गहरी पकड़ रखने वाले व पंजाब जनसंघ को मजबूत स्थिति में लाने के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाता है।

                               अमृतसर के पुराने शहर के चौक पासियां की एक तंग गली में स्थित पैतृक घर में राजनीति का ककहरा सीखने से लेकर छत्तीसगढ़ के राजभवन के सफर के पीछे 62 साल का राजनीतिक संघर्ष छिपा हुआ है। पिता रूपलाल टंडन के घर में जन्म के बाद जब बलराम दास (बीडी) टंडन ने होश संभाला तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा उनके जीवन के रास्ते तय कर चुकी थी। 1950-51 में बीडी टंडन संघ का प्रचार करने के लिए हिमाचल प्रदेश के चंबा गए हुए थे। रात को उन्हें संदेश दिया गया कि वह जल्द डलहौजी पहुंचें, जहां संघ के प्रचारकों की बैठक है।

                              श्री टंडन रात को ही 35 किलोमीटर के सफर पर पैदल निकल पड़े और सुबह डलहौजी पहुंच गए। 1953 में भारतीय जनसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के लिए विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था। तब श्री टंडन को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। वह धर्मशाला की यौल जेल में बंद कर दिए गए थे। इसी बीच अमृतसर म्युनिसिपल कमेटी के चुनावों की घोषणा हुई। श्री टंडन ने भी नामांकन पत्र भरकर भेजा और जीत दर्ज की।

                             राजनीतिक पारी का आगाज करते हुए श्री टंडन जब रिहा हुए तो उन्होंने अमृतसर में भारतीय जनसंघ को मजबूत किया। 1967 व 69 में वह विधानसभा का चुनाव अमृतसर केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र से जीते। आपातकालीन के समय उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। जेल में फुटबाल खेलते हुए उनका घुटना टूट गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें पैरोल पर रिहा होने की सलाह दी, लेकिन टंडन नहीं माने। आपातकालीन समाप्त होने के बाद 1977 में फिर चुनाव लड़ा, जीते और प्रकाश सिंह बादल सरकार में मंत्री बने।

बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते है श्री टंडन
राज्यपाल बलराम दास टंडन अपने राजनीतिक कैरियर में हमेशा बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते है। उनके अंदाज कुछ एेसे रहते थे कि कई बार अपनी ही सरकार के फैसलों की आलोचना कर उसे कटघरे में खड़ा कर देते थे। जिसकी वजह से कई फैसलों पर सरकार को पुनर्विचार कर उसे वापस भी लेना पड़ता था।

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