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आजादी से अब तक कांग्रेस की झोली में रही खरसिया सीट, क्या खरसिया जीत पाएगी इस बार भाजपा

रायपुर। आजाद भारत से लेकर अब तक खरसिया की सीट को कांग्रेस का अभेद किला माना जाता रहा है। अब तक यहां से भाजपा ने एक भी बार अपनी जीत दर्ज नहीं की है। साल 1977 में खरसिया को विधानसभा क्षेत्र बनाया गया, तब से लेकर आज तक यह सीट कांग्रेस के पाले में ही रही। खरसिया भाजपा के पितामाह कहे जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है।

                       वर्तमान में खरसिया सीट से उमेश पटेल विधायक है। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार पटेल पांच बार यहां से विधायक बने। उनसे पहले कांग्रेस के ही लक्ष्मी प्रसाद पटेल के पास यह सीट रही। वे भी 1977 से 1988 तक विधायक रहे। इस बार इस सीट पर भाजपा आईएएस अधिकारी और रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी के सहारे कांग्रेस की इस अजेय सीट पर अपनी मुहर लगाना चाहती है।

                    1977 में खरसिया विधानसभा सीट बनने के बाद पहला चुनाव हुआ, तो कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल विधायक बने। वे 1988 तक लगातार विधायक रहे। उन्होंने अर्जुन सिंह के लिए अपनी सीट से इस्तीफा दिया। यहां उपचुनाव हुआ और कांग्रेस से अर्जुन सिंह के खिलाफ भाजपा के दिलीप सिंह जूदेव उतरे। इसमें अर्जुन सिंह ने जीत हासिल की और कांग्रेस का वर्चस्व खरसिया में कायम रहा। इसके बाद कांग्रेस से नंदकुमार पटेल 1990, 1993, 1998, 2003 और 2008 तक लगातार पांच बार जीत हासिल करके विधायक सीट कब्जे में रखी। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई। जिसके बाद इस सीट उनके बेटे उमेश पटेल को कांग्रेस ने टिकट दे दिया। पहली बार चुनावी समर में उतरे उमेश पटेल ने जीत का इतिहास रच दिया। वर्तमान में इस सीट से उमेश पटेल ही विधायक है।

                           वहीं अगर ओपी चौधरी भाजपा प्रवेश करते है और उन्हें खरसिया से भाजपा मैदान में उतारती है। तो इस बार खरसिया सीट में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। क्योंकि इस सीट में अब तक जातिगत समीकरण बैठता आया है। आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी मूलरूप से खरसिया विधानसभा के ही निवासी हैं। वह भी अघरिया (पटेल) समाज से हैं। इससे पहले इस सीट में अब तक अघरिया (पटेल) समाज के प्रत्याशियों की ही जीत हुई है। इसके साथ ही कलेक्टर रहते हुए ओपी चौधरी ने कई एेसे काम किए है जिससे वे लोगों के दिलों में अपनी एक अलग ही छवि बनाए हुए है। इसके साथ ही वे युवाओं में एक रोल मॉडल के रुप में अपनी पहचान रखते है। उनकी यही छवि इस बार खरसिया सीट में कांग्रेस को जोरदार टक्कर दे सकती है।

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