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एससी-एसटी एक्टः सवर्णों का भारत बंद आज, कई राज्यों में अलर्ट और धारा 144 भी लागू

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) संशोधन अधिनियम के खिलाफ सवर्ण संगठनों ने बृहस्पतिवार को भारत बंद का एलान किया है। बंद का आह्वान सवर्ण समाज, करणी सेना, सपाक्स एवं कई अन्य संगठनों ने किया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भारत बंद की अपील सोशल मीडिया की देन है और किसी एक संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। इसके बावजूद देश के सभी जिलों में पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। बंद के मद्देनजर देशभर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। कई जगह धारा 144 लगा दी गई है। किसी भी हिंसा-उपद्रव से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। बंद का समर्थन करने वाले संगठनों का कहना है कि वे जाति और धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध करते हैं। बंद का समर्थन करने वाले संगठनों ने सड़कों पर उतरने और प्रमुख नेताओं का घेराव करने की तैयारी की है।

यूपी में अलर्ट

भारत बंद को देखते हुए यूपी में अलर्ट जारी किया गया है। डीजीपी मुख्यालय ने इस संबंध में सभी जिला अधिकारियों को जरूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील जिलों में पीएसी व अर्द्धसैनिक बलों को जरूरत के लिहाज से तैनात किया गया है। खुफिया विभाग को सतर्क रहने को कहा गया है। जानकारों के अनुसार राज्य के खुफिया विभाग ने बिजनौर, इलाहाबाद, कासगंज, बांदा, भदोही, हरदोई, बरेली, मथुरा, आजमगढ़, लखनऊ व मऊ आदि जिलों को अधिक संवेदनशील मानते हुए रिपोर्ट भेजी हैं।

एक्ट में संशोधन वोटों की राजनीति

गौतमबुद्धनगर के कई संगठनों ने भारत बंद को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि यह सिर्फ वोटों की राजनीति है, इसे वापस लिया जाए। वहीं, जिले भर में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। एसएसपी ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह किसी भी प्रतिष्ठान को जबरन बंद न कराने दें और जबरदस्ती करने पर सख्त कार्रवाई करें।

मध्य प्रदेश के तीन जिलों में 144 लागू

भारत बंद को देखते हुए मध्य प्रदेश के तीन जिलों मुरैना, भिंड एवं शिवपुरी में एहतियातन धारा 144 लगा दी गई है। धारा 144 भारत बंद के अगले दिन यानी 7 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। पिछली बार एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को बुलाया था। तब सबसे ज्यादा हिंसा मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में हुई थी।

राजस्थान में स्कूल-कॉलेज बंद

राजस्थान में सवर्ण समाज के कई संगठनों ने भारत बंद का समर्थन दिया है। संगठनों ने कर्मचारी अधिकारियों से दफ्तर न जाने, अभिभावकों से अपने बच्चों को स्कूल न भेजने, दुकान व फैक्ट्री संचालकों से अपने-अपने प्रतिष्ठान नहीं खोलने का आह्वान किया है। लगभग सभी शिक्षण संस्थानों ने छुट्टी की घोषणा कर दी है। कई सरकारी कर्मचारियों ने बंद का समर्थन करते हुए छुट्टी की अर्जी भी लगा दी है। कई फैक्ट्री मालिकों ने स्टाफ को छुट्टी देकर फैक्ट्री बंद रखने के निर्णय किया है।
विधानसभा चुमावों में बंद का दिख सकता है असर
क्या है विरोध

एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिये मूल कानून में धारा 18ए जोड़ी जाएगी। इसके जरिये पुराना कानून बहाल हो जाएगा और सुप्रीम कोर्ट का फैसला रद्द हो जाएगा। मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी और अग्रिम जमानत नहीं देने का प्रावधान है। आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी. मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी ही करेंगे। सवर्ण संगठनों इन्हीं प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं।

सवर्णों को शांतिपूर्वक आक्रोश जताने का हक : कांग्रेस

भारत बंद के आह्वान पर कांग्रेस ने कहा है कि उच्च जातियों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी नाराजगी जाहिर करने का पूरा हक है। पार्टीे प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश में लोगों में बेचैनी है और यह सिर्फ उच्च जातियों तक ही सीमित नहीं है। केंद्र सरकार के खिलाफ देश में हर समाज के लोगों में आक्रोश और चिंता है। देश में अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, रुपया डूब रहा है, भयंकर बेरोजगारी है। नोटबंदी और दोषपूर्ण जीएसटी से व्यापारी, उद्योग सभी परेशान हैं। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेदार है। उसे लोगों की चिंताओं और परेशानियों का जवाब देना चाहिए।

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