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बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण की 16वीं बैठक, जल्द लागू होगी प्रदेश में यह नीति

रायपुर। राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति 2018 छत्तीसगढ़ में भी जल्द लागू की जाएगी। इस सिलसिले में मुख्य सचिव अजय सिंह की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण की 16वीं बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में बायोफ्यूल की राष्ट्रीय नीति 2018 को छत्तीसगढ़ में प्रभावित तरीके से लागू करने के लिए राज्य के विभिन्न विभागो की भागीदारी, प्राधिकरण एवं विभिन्न निवेशकों के बीच पूर्व में किये गए एमओयू के तहत बायोडीजल संयंत्र की स्थापना, दुर्ग जिले में बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स की स्थापना, राज्य में बायोफ्यूल की जांच के लिए प्रयोगशाला की स्थापना सहित अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी। श्री सिंह ने राज्य में बायोफ्यूल से संबंधित उत्पाद कितनी मात्रा में हो रहें है, राज्य में कितनी मात्रा में उनकी खरीदी हो रही है और कितनी मात्रा में राज्य से बाहर खरीदे जा रहे है। इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।

                            उन्होंने बायोफ्यूल उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य की उद्योग नीति में प्रावधान करने के लिए अन्य राज्यों की उद्योग नीति का अध्ययन करने कहा है। उन्होंने प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दर पर ही बायोफ्यूल उत्पादों की खरीदी-बिक्री सुनिश्चत करने कहा है। बैठक में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने राज्य में बायोफ्यूल उत्पादन प्लांट की स्थापना के संबंध में अपना पक्ष रखा। यह प्लांट छत्तीसगढ़ शासन और भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किये जाएंगे। मुख्य सचिव ने इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है।

                                 बैठक में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के कार्यकारी संचालक अंकित आनंद ने बताया कि राष्ट्रीय जैव ईधन नीति का प्रकाशन भारत के राजपत्र में 4 जून 2018 को किया गया है। इस नीति का राज्य में प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किये जाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, वन, विज्ञान एवं तकनीकी, परिवहन, ऊर्जा, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। ये सभी विभाग नीति के तहत सौंपे गये विभिन्न कार्यो का क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर करेंगे। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण एवं सेमीफिनिस्ड बायोफ्यूल भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून के मध्य बायोजेट ऐवियेशन फ्यूल के विकास के लिए एमओयू किया गया है। राज्य से 15 हजार मीटरिक टन जेटरोफा अब तक देहरादून को प्रदाय किया जा चुका है और नवम्बर माह तक दस हजार मीटरिक टन जेटरोफा और भेजा जाना है। बैठक में जानकारी दी गयी कि दुर्ग जिले के गोढ़ी और ठेंगाभाठ के बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स परियोजना में अखाद्य तैलीय बीजों का अनुसंधान एवं विकास का कार्य और करंजजर्मप्लाज संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इन स्थानों पर बायो डीजल के खुदरा विक्रय स्थापना के लिए हिन्दूस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड को कार्य आदेश जारी कर दिया गया है।

                                   बैठक में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण और आईआईटी भिलाई के बीच एमओयू का प्रस्ताव रखा गया। जिसके अनुसार आईआईटी भिलाई द्वारा जैव ईधन और बायो एनर्जी के क्षेत्र में शैक्षणिक और शोध कार्य हेतु सहयोग किया जाएगा। साथ ही संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शोध कार्य किये जाएंगे। समिति ने इस हेतु स्वीकृति प्रदान की है। बैठक में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा राज्य में बायोमास से बायोसीएनजी उत्पादन के लिए चार सौ प्लांट स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। इन प्लांट में कृषि अपशिष्टों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना के क्रियान्वयन से आगामी पांच सालों में लगभग पांच हजार करोड़ रूपए का निवेश राज्य में होगा तथा चार हजार लोगों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलेंगे।

                                      मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव के सभी पक्षों का विस्तृत अध्ययन करने एवं कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आरपी मण्डल, सचिव राजस्व एनके खाखा, सचिव उद्योग डॉ. कमलप्रीत सिंह, सचिव कृषि एके श्रीवास्तव, विशेष सचिव ऊर्जा सिद्धार्थ कोमल परदेशी, मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह, परियोजना अधिकारी छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण सुमीत सरकार सहित विभागीय अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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