कुख्यात गांजा तस्कर रवि साहू को 10 साल की सजा, एनडीपीएस कोर्ट का कड़ा फैसला

रायपुर। राजधानी रायपुर का कुख्यात गांजा तस्कर रवि साहू आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। स्पेशल जज एनडीपीएस किरण थवाईत की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दोष सिद्ध होने पर रवि साहू को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में उसे अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।

हिस्ट्रीशीटर रवि साहू पर वर्ष 2023 में माना बस्ती में हुई लल्ला बंजारे की हत्या सहित कई गंभीर अपराधों में संलिप्तता के आरोप हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह निगम और राजनीतिक नेताओं के लिए भीड़ जुटाने, चुनाव के दौरान शराब-पैसा और गुंडों की व्यवस्था कराने जैसे अवैध कामों में भी सक्रिय रहा है।

रवि साहू की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने विशेष रणनीति अपनाई। उसे मोहल्ले में पैदल घुमाया गया, ताकि आम लोगों को यह संदेश दिया जा सके कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है और उसे सजा जरूर मिलेगी। उसकी गिरफ्तारी सिविल लाइन थाना क्षेत्र में की गई थी, जहां संभावित हिंसा को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।

रवि साहू के खिलाफ रायपुर के विभिन्न थानों में गांजा तस्करी, सट्टा-जुआ, हत्या का प्रयास, मारपीट, अवैध शराब कारोबार और धमकी जैसे 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह फैसला संगठित अपराध और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

अदालत ने रवि साहू समेत उसके छह साथियों को भी दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में कोतवाली निवासी रवि साहू, अनील उर्फ अली जुल्फेकार, संजय उर्फ लेंडी जुल्फेखार तथा ओडिशा के बलांगीर जिले के निवासी गणेश बागर्ती, विक्रम शाह और प्रियवंत कुम्हार शामिल हैं।

विशेष लोक अभियोजक भुवन लाल साहू ने बताया कि 4 फरवरी 2025 को गांजा तस्करी की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा था। उनके कब्जे से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया, जिसे बैग में रखकर पुड़िया बनाकर ग्राहकों को बेचा जा रहा था।

पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत केस डायरी के अनुसार मुखबिर की सूचना पर कालीबाड़ी चौक में दबिश दी गई थी, जहां रवि साहू के गुर्गे गांजा बेचते पाए गए। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे रवि साहू के निर्देश पर ही यह अवैध कारोबार चला रहे थे।

सभी साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही पाते हुए अदालत ने आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी करार दिया और कड़ी सजा सुनाई।

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