यूजीसी गाइडलाइन अच्छी, विरोध से पहले अध्ययन जरूरी—डॉ. आशा लकड़ा

रायपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने आज रायपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने यूजीसी की नई गाइडलाइन को अच्छा बताया और धर्मांतरण समेत जनजातीय समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वे लगातार जनजातीय क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं।

डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि वे कल कोंडागांव में महतारी सदन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगी और वहां महतारी बहनों से संवाद करेंगी। इसके बाद वे जगदलपुर में एनएमडीसी का निरीक्षण करेंगी और सीएसआर (CSR) के माध्यम से जनजातीय समाज को मिल रहे लाभों की समीक्षा करेंगी। उन्होंने कहा कि जहां-जहां कमियां सामने आएंगी, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही जनजातीय समुदाय के संरक्षण और संवर्धन को लेकर आयोग की ओर से रिपोर्ट भी सौंपी जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने यूजीसी की नई गाइडलाइन पर भी बयान दी। उन्होंने कहा कि जो लोग इस गाइडलाइन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले इसका अध्ययन करना चाहिए और कानूनी सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह गाइडलाइन बेहद अच्छी है।

वहीं धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर किसी ने धर्मांतरण किया है और फिर भी आरक्षण लेना चाहता है, तो उसे आरक्षण छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी परंपराएं और रूढ़ियां छोड़ देते हैं, वे जनजातीय समुदाय का हिस्सा नहीं माने जाएंगे। ऐसे लोगों की डी-लिस्टिंग की जाएगी।

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