प्रदेश के कई जिलों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। कई निजी अस्पताल एजेंटों के जरिए ओडिशा से लोगों को गाड़ियों में लाकर भर्ती कर रहे हैं, इसके बदले एजेंटों को प्रति मरीज 3 से 5 हजार रुपए का कमीशन दिया जाता है।
अस्पताल मामूली बीमारी जैसे कमर दर्द के लिए भी 90 हजार से लेकर 1लाख रुपए तक का फर्जी बिल बनाते हैं और योजना के तहत क्लेम करते हैं।
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड धारकों को प्रसव, बवासीर, मोतियाबिंद, बच्चादानी और हाइड्रोसिल जैसी बीमारियों का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही मिलता है, जबकि ओडिशा में बीजू स्वास्थ्य कार्ड से लोगों को निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में इलाज की सुविधा है। इसका लाभ उठाकर दोनों राज्यों में मेडिकल माफिया सक्रिय हैं, जो ओडिशा से लाये गए लोगों के इलाज के नाम पर भ्रष्टाचार करते हैं। यह गड़बड़ी सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को उजागर करती है, सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

