मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड से दो कैदी फरार, एक महीने में दूसरी घटना से पुलिस प्रशासन में हड़कंप

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में मंगलवार सुबह सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड से दो विचाराधीन बंदी फरार हो गए। दोनों कैदी अलग-अलग मामलों में जेल में बंद थे और इलाज के लिए अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती थे।

फरार होने वाले कैदियों की पहचान रितेश सारथी, निवासी आंधला, थाना लखनपुर, और पवन पाटिल, निवासी ग्राम जमडी, थाना झिलमिली, के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार रितेश सारथी पास्को एक्ट (POCSO) के मामले में विचाराधीन बंदी था, जबकि पवन पाटिल एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत गिरफ्तार आरोपी था। दोनों को स्वास्थ्य कारणों से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड में भर्ती कराया गया था।

जेल वार्ड में उस समय कुल चार बंदी भर्ती थे, जिनकी निगरानी के लिए पुलिस गार्ड तैनात थे। बावजूद इसके, दो बंदियों के फरार होने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना की पुष्टि सेंट्रल जेल अधीक्षक अक्षय राजपूत ने की है। उन्होंने बताया कि दोनों विचाराधीन बंदी रात के समय वार्ड से फरार हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे अस्पताल परिसर की तलाशी शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों कैदियों की तलाश के लिए शहर के सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने फरार कैदियों के संभावित ठिकानों पर भी दबिश देना शुरू कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, यह घटना एक महीने के भीतर दूसरी बार हुई है जब अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से कैदी फरार हुए हैं। इससे पहले भी एक कैदी इलाज के दौरान अस्पताल से भाग निकला था, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, इस बार फिर से दो कैदियों के फरार होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जेल वार्ड में लगे कुछ सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे फरारी की घटना का सटीक वीडियो नहीं मिल पाया है। पुलिस अब अस्पताल के अन्य कैमरों और आसपास के इलाकों के फुटेज खंगाल रही है।जेल अधीक्षक ने कहा कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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