अंबिकापुर। सरगुजा ज़िले के धौरपुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पदस्थ एक हल्का पटवारी ने सरकारी नौकरी में रहते हुए तीन शिक्षकों से जमीन बिक्री के नाम पर लाखों की ठगी की। आरोपी पटवारी ने न सिर्फ फर्जी स्टांप पेपर तैयार कर सौदे का नाटक रचा, बल्कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू किए बिना शिक्षकों से कुल ₹14 लाख से अधिक की राशि हड़प ली।
धौरपुर के ग्राम करौली निवासी शिक्षक मुनेश्वर राम पैकर ने थाना धौरपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथी शिक्षक अनुक दास और सूर्यदेव तिग्गा के साथ मिलकर उन्होंने गांव के ही हल्का पटवारी जीवन प्रकाश एक्का (38 वर्ष), निवासी सिलसिला, थाना लुंड्रा से जमीन खरीदने का सौदा किया था। पटवारी ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि ग्राम करौली निवासी हिरमनिया नामक महिला अपनी जमीन बेचना चाहती है और वह बिक्री की पूरी प्रक्रिया में मदद करेगा।
पटवारी ने रचा ठगी का जाल
पटवारी ने कुल ₹16 लाख में सौदा तय कराया और बताया कि वह हिरमनिया की ओर से बिक्री के सारे दस्तावेज तैयार कराएगा। शिक्षकों ने 26 दिसंबर 2024 को उसे ₹9 लाख नकद सौंप दिए। इसके बाद पटवारी ने कथित तौर पर खुद और भूमि स्वामिनी के नाम से स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी कर दी, जिससे शिक्षकों को विश्वास हो गया कि सौदा पक्का है। लेकिन जब रजिस्ट्री की बारी आई, तो उसने जमीन मालिक के बीमार होने का बहाना बना दिया।
कुछ दिनों बाद, 4 जनवरी 2025 को पटवारी ने दोबारा पैसों की जरूरत बताई और ₹5,12,950 रुपये और ले लिए। इसके बाद भी रजिस्ट्री की तारीख आगे बढ़ाई जाती रही। जब शिक्षकों को शक हुआ, तो वे असली जमीन मालिक हिरमनिया से मिलने पहुंचे। तब पूरी सच्चाई सामने आई — हिरमनिया ने कभी अपनी जमीन बेचने की बात नहीं की थी, और न ही उसने पटवारी को ऐसा कोई अधिकार दिया था।
पुलिस ने पकड़ा आरोपी पटवारी
शिक्षकों की शिकायत पर धौरपुर थाना पुलिस ने मामले में धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने पटवारी द्वारा तैयार किए गए फर्जी स्टांप पेपर जब्त किए और आरोपी की तलाश शुरू की।
जांच में सभी आरोप सही पाए गए। पुलिस ने आरोपी पटवारी जीवन प्रकाश एक्का को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें उसने ठगी करने की बात स्वीकार कर ली।
न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।यह घटना सरकारी कर्मचारियों की ईमानदारी पर सवाल खड़ा करती है। एक ओर जहां शिक्षक अपने परिश्रम से अर्जित धन से जमीन खरीदने की उम्मीद में थे, वहीं दूसरी ओर उसी तंत्र का एक हिस्सा बनकर पटवारी ने उनका विश्वास तोड़ दिया।पुलिस ने कहा कि मामले में आगे और भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं पटवारी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी ठगा न हो।

