चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित, सोमवार को होगा निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर शनिवार को भी कोई फैसला नहीं हो सका। रायपुर की ED स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में अपना निर्णय सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वे रायपुर जेल में बंद हैं। वहीं, कोयला घोटाले से जुड़े मामले में EOW अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेज बनाने और बयानों में छेड़छाड़ करने के आरोपों को लेकर रायपुर कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में अब 4 नवंबर को अधिकारियों की ओर से लगाई गई आपत्ति पर सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन ने EOW पर झूठे सबूत तैयार करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है।

चैतन्य बघेल को शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले, जिसे उन्होंने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश करके वाइट करने की कोशिश की। ED का दावा है कि चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया और सिंडिकेट के साथ मिलकर लगभग 1000 करोड़ रुपए की हेराफेरी की। ED की जांच में सामने आया कि चैतन्य बघेल के “विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट” (बघेल डेवलपर्स) में शराब घोटाले का पैसा निवेश किया गया। प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर ED ने छापेमारी कर रिकॉर्ड जब्त किया था। कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, जबकि रिकॉर्ड में केवल 7.14 करोड़ दिखाए गए। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से यह भी पता चला कि बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए नकद भुगतान किया, जो रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था।

ED ने अपनी जांच में यह भी पाया कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपए बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। फ्लैट उनके कर्मचारियों के नाम पर खरीदे गए, लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने किया। कर्मचारियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि फ्लैट उनके नाम पर थे, लेकिन पैसा ढिल्लो ने दिया। यह पूरा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। ED का दावा है कि यह लेन-देन पहले से नियोजित था, ताकि ब्लैक मनी को छिपाकर चैतन्य तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए उधार दिए, जो बाद में बघेल की दो कंपनियों में लोन के रूप में ट्रांसफर हो गए। ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे, जिसकी कीमत 80 लाख रुपए थी। ED के अनुसार, यह पैसा शराब घोटाले से आया था और बैंक के माध्यम से ट्रांसफर करके कानूनी दिखाया गया।

ED ने बताया कि चैतन्य बघेल ने घोटाले के पैसे को पाने के लिए विभिन्न व्यक्तियों और कंपनियों का इस्तेमाल किया ताकि एजेंसियां ट्रैक न कर सकें। जैसे कि ढिल्लन सिटी मॉल में पैसा आया, फिर ढिल्लन ड्रिंक्स से कर्मचारियों को ट्रांसफर किया गया, और फिर वही पैसा बघेल डेवलपर्स के पास गया। ED का दावा है कि इस तरह चैतन्य बघेल के पास कुल 16.70 करोड़ रुपए अवैध तरीके से पहुंचे। ED के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया कि शराब घोटाले की जांच में कई एविडेंस मिले हैं, जिसमें स्पष्ट है कि चैतन्य बघेल ने पैसों की लेयरिंग की और लगभग 1000 करोड़ रुपए का लेन-देन किया गया। पप्पू बंसल के बयान में यह खुलासा हुआ कि शराब घोटाले के पैसे को चैनलाइज्ड तरीके से चैतन्य तक पहुंचाया गया।

ED के अनुसार, शराब घोटाले का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा, फिर केके श्रीवास्तव और कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से चैतन्य बघेल तक गया। जांच में मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग के जरिए यह भी पता चला कि आरोपी और अन्य लोगों के बीच कनेक्शन था। चैतन्य बघेल के खिलाफ ED की कार्रवाई में ब्लैक मनी वाइट करने, फर्जी निवेश दिखाने, कैश भुगतान छिपाने और सिंडिकेट के माध्यम से बड़ी रकम हेराफेरी करने के आरोप शामिल हैं। कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है और अगले सोमवार को सुनवाई होगी। इस पूरे मामले में रायपुर की ED स्पेशल कोर्ट की कार्रवाई और EOW के अधिकारियों के खिलाफ आरोपों ने राजनीतिक और कानूनी चर्चा को तेज कर दिया है। शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासनिक जांच दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।

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