रायपुर/मुंबई। हिंदी सिनेमा जगत से एक और दिग्गज सितारा हमेशा के लिए दूर हो गया। मशहूर गायिका और अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित का 6 नवंबर 2025 को मुंबई के नानावटी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके जाने से संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर है। 1970 और 80 के दशक में अपनी मधुर आवाज़ और सादगी भरे अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली सुलक्षणा ने लगभग तीन दशकों तक हिंदी फिल्म उद्योग को अनमोल योगदान दिया।
रायगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर से उभरी एक सुर साधिका
12 जुलाई 1954 को रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में जन्मी सुलक्षणा पंडित संगीत के समृद्ध परिवार से थीं। उनके पिता प्रताप नारायण पंडित राजा चक्रधर सिंह के दरबार के जाने-माने तबला वादक थे। परिवार में संगीत वादन और गायन एक परंपरा थी। उनके चाचा पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे, जबकि उनके भाई जतीन-ललित की संगीतकार जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार मेलोडी दीं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि सुलक्षणा की संगीत यात्रा की जड़ें रायगढ़ की उस सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी थीं जहाँ संगीत केवल कला नहीं, जीवनधारा है। उन्होंने बताया कि सुलक्षणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के शासकीय बालिका विद्यालय से प्राप्त की और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर रौशन किया।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने सुप्रसिद्ध फिल्म नायिका सुलक्षणा पण्डित के देहावसान पर गहन शोक व्यक्त कर इसे छत्तीसगढ़ की अपूरणीय क्षति बताया है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जन्म लेकर और विद्यालयीन पढ़ाई कर देश-विदेश में अपनी अदाकारी से सुलक्षणा पण्डित ने भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। अदाकारी के साथ-साथ संगीत व गायन के क्षेत्र में भी उनका अहम योगदान रहा। श्री देव ने कहा कि उनकी प्रतिभा छत्तीसगढ़स की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा की परिचायक रही। उनका पूरा परिवार भारतीय सिनेमा को समृद्ध करने में जुटा रहा है। श्री देव ने पण्डित-परिवार के प्रति सम्वेदना व्यक्त कर परमपिता परमेश्वर से उनकी आत्मा को चिरशांति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
बचपन से सुरों में ढली ज़िंदगी
सुलक्षणा ने मात्र 9 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। 1967 में उन्होंने फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की और जल्द ही अपनी मधुर आवाज से इंडस्ट्री में पहचान बना ली। 1975 में फिल्म संकल्प के गीत ‘तू ही सागर है तू ही किनारा’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जो आगे उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुआ। उनकी गायकी में मिठास और आत्मीयता का भाव सुनने वालों के दिल को छू लेता था।
अधूरी प्रेम कहानी – संजीव कुमार से एकतरफा प्यार
सुलक्षणा पंडित और अभिनेता संजीव कुमार की प्रेम कहानी आज भी बॉलीवुड के इतिहास की सबसे मार्मिक प्रेम कहानियों में गिनी जाती है। कहा जाता है कि सुलक्षणा ने संजीव कुमार से विवाह का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अभिनेता ने इसे स्वीकार नहीं किया। संजीव कुमार का दिल पहले से किसी और के लिए धड़कता था, और इस एकतरफा प्यार ने सुलक्षणा की जिंदगी को भीतर तक तोड़ दिया।
उन्होंने जीवनभर शादी नहीं की और संजीव कुमार के निधन के बाद गहरे अवसाद में चली गईं। यही दर्द उनके जीवन का सबसे बड़ा खालीपन बन गया।
अभिनय में भी दर्ज की मजबूत मौजूदगी
सिर्फ गायन ही नहीं, सुलक्षणा ने फिल्मों में भी काम किया और उलझन (1975), संकुच (1976) समेत कई फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी संजीव कुमार के साथ ऑन-स्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। पर्दे पर दिखने वाली मासूमियत और सादगी उनकी वास्तविक जीवन की छवि से मेल खाती थी।
संघर्ष, तन्हाई और आखिरी पड़ाव
संजीव कुमार के निधन के बाद वे धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से दूर होती गईं। दिक्कतें बढ़ीं—आर्थिक परेशानियां, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अकेलापन उनके जीवन का हिस्सा बन गया। बावजूद इसके उन्होंने संगीत और परिवार से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ा। अंतिम दिनों में वह लगभग एक शांत, अकेलेपन भरी जिंदगी जी रही थीं।उनके निधन के साथ एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया है, जिसमें संगीत, सादगी, अधूरा प्रेम और भावनाओं की गहराई सब समाहित थीं।

