रायपुर। तमनार में आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बेहद दुखद बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोयला खनन के लिए जबरन जल, जंगल और जमीन की बेदखली पर उतर आई है। बैज ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में ही आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और सरकार जनता के हित में नहीं, बल्कि उद्योगपतियों के इशारे पर काम कर रही है।
दीपक बैज ने कहा कि तमनार के गारे–पेलमा सेक्टर-1 में कोयला खदान आवंटन और कथित फर्जी जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीण और आदिवासी शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उद्योगपतियों के दबाव में लाठियां चलवाकर दमन किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की ओर से हुआ प्रतिरोध सरकार की हठधर्मी नीति का ही नतीजा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण अपनी पुश्तैनी जमीन देना नहीं चाहते हैं। 14 गांवों की ग्राम सभाओं और ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कोयला उत्खनन का विरोध किया है। उनका कहना है कि खनन से खेती, बाड़ी और पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बावजूद सरकार जबरन जमीन अधिग्रहित कर खनन शुरू कराना चाहती है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में अमेरा, खैरागढ़, हसदेव और तमनार सहित कई क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों की सहमति के बिना उन्हें बेदखल किया जा रहा है। जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि टकराव के बाद पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज कर दमन शुरू कर दिया है। तमनार संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और वहां पेसा कानून लागू है, जिसके तहत संसाधनों का दोहन प्रभावितों की सहमति से ही किया जाना चाहिए। बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के अधिनायकवादी रवैये में असहमति के लिए कोई जगह नहीं है और ग्रामीणों के विरोध को बर्बरता से कुचला जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीणों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार न किया जाए, क्योंकि यह पूरी घटना प्रशासनिक चूक का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और पुलिस ने दमन बंद नहीं किया, तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।

