AI in Banking Sector, यूरोप की आलीशान बैंक इमारतों और व्यस्त डेस्क के पीछे एक शांत लेकिन गहरी हलचल शुरू हो गई है। दशकों से जिस बैंकिंग व्यवस्था को इंसानी सूझबूझ और व्यक्तिगत रिश्तों के दम पर चलाया गया, वह अब एल्गोरिदम और मशीन लर्निंग के एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है।
एल्गोरिदम का उदय और बंद होते दरवाजे
मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगले पांच वर्षों में यूरोपीय बैंकिंग परिदृश्य पूरी तरह से बदल सकता है। यह बदलाव केवल नई मशीनों को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहा है जो पारंपरिक ब्रांचों का हिस्सा रहे हैं। जैसे-जैसे डिजिटल इंटरफेस फिजिकल बैंकों की जगह ले रहे हैं, कर्मचारियों की जरूरतें भी तेजी से कम होती जा रही हैं।
वित्तीय संस्थान अब ‘ऑपरेशनल एफिशिएंसी’ यानी कार्यकुशलता के उस स्तर की तलाश में हैं जो इंसानों के लिए मुमकिन नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर अपनाया जाना केवल फाइलों का बोझ कम करने के लिए नहीं है, बल्कि बैंकिंग के पूरे ढांचे को स्वचालित बनाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
एक बदलता हुआ भविष्य
यह केवल तकनीकी प्रगति की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की चिंता भी है जो बैंकिंग करियर पर निर्भर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिजिकल ब्रांचों में लगातार आ रही कमी इस बात का संकेत है कि बैंक अब अपनी ईंट-पत्थर की दीवारों को छोड़कर क्लाउड सर्वर की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का सबसे सीधा और कड़ा असर स्टाफ की कटौती के रूप में देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय
“अगले पांच सालों में यूरोप में स्टाफ की जरूरतें कम हो सकती हैं क्योंकि बैंक AI सिस्टम से मिलने वाली ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार की संभावनाएं तलाश रहे हैं।”

