पखांजूर। कांकेर जिले में सोमवार को एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसमें उपस्वास्थ्य केंद्र के एक अधिकारी द्वारा एक्सपायरी दवाइयों को जलाने से निजी स्कूल के बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सरस्वती शिशु मंदिर PV-43 के पास दोपहर में हुए इस हादसे ने न सिर्फ स्कूल प्रशासन बल्कि स्थानीय लोगों में भी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पखांजूर के उपस्वास्थ्य केंद्र के RSO विवेक बड़ाई ने स्कूल की सीमा से सटे क्षेत्र में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयों को आग के हवाले कर दिया। जलती दवाओं से उठने वाला जहरीला धुआँ हवा के साथ सीधे स्कूल परिसर की ओर फैलने लगा। उस समय स्कूल में लगभग 40 बच्चे उपस्थित थे, जिनमें से कई बच्चों ने धुएँ की वजह से सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की।
दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही स्कूल के कमरों में धुआँ भरना शुरू हुआ, शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे लगातार खाँसने लगे और कई छात्राएँ बेहोशी जैसी स्थिति में पहुंच गईं। स्कूल प्रशासन ने तत्काल बच्चों को खुले स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन हालत गंभीर होने पर 8 छात्राओं को तत्काल सिविल अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, सभी बच्चियाँ खतरे से बाहर हैं और उनके स्वास्थ्य में सुधार जारी है। हालांकि धुएँ में मौजूद रासायनिक तत्वों के कारण उन्हें सांस लेने में कठिनाई, सीने में जलन और उलझन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि ऐसी दवाइयाँ जलाना अत्यंत खतरनाक है क्योंकि इनके धुएँ में जहरीले केमिकल मौजूद रहते हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए तुरंत स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
दूसरी ओर, इस घटना ने उपस्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली और उसकी निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के लोगों और अभिभावकों ने RSO की इस हरकत को “गंभीर लापरवाही” बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आमतौर पर एक्सपायरी दवाइयों को नष्ट करने के लिए सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि बायो-मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल यूनिट या अधिकृत एजेंसियों को सौंपना। लेकिन स्कूल के पास खुले में दवाइयाँ जलाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायज़ा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों के आसपास किसी भी प्रकार के चिकित्सा अपशिष्ट को जलाने या फेंकने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

