रायपुर। PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने आज 2 सितंबर को कॉंग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बस्तर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ित ग्रामीणों को दी जाने वाली राहत सामग्री पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासन द्वारा वितरित की जा रही राहत सामग्री पर कहा है कि बाढ़ पीड़ितों का मजाक उड़ाया जा रहा है।
दीपक बैज ने बताया है कि प्रशासन द्वारा बस्तर के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री के नाम पर अपमानजनक मदद दी जा रही है, लोगों को सिर्फ एक-एक पाव चावल, दाल और तेल दिया जा रहा है। इसके अलावा, दस-दस रुपए की सोयाबीन बड़ी और चने के छोटे पैकेट बांटे गए हैं, उन्होंने यह भी कहा है कि जिन पीड़ितों के पास न तो बर्तन हैं और न ही पीने का साफ पानी, उन्हें सूखा राशन देकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का बस्तर दौरा केवल दिखावा और औपचारिकता
मुख्यमंत्री द्वारा बाढ़ पीड़ितों की वास्तविक समस्याओं के निवारण के लिए कोई ठोस पहल नही किया, दीपक बैज ने कहा है कि मुख्यमंत्री सिर्फ औपचारिकता निभाने ही बस्तर गए थे।
मुख्यमंत्री के बस्तर दौरे के दौरान केवल दो-तीन बाढ़ से प्रभावित परिवारों को ही राहत चेक दिया गया, कुछ महिलाओं को साड़ियां बांटी गईं, लेकिन वे भी फटी हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जब पीड़ितों ने इस पर आपत्ति जताई और शिकायत किया तो उन्हें मदद करने के बजाय थाने ले जाकर 3 घंटे तक बैठा दिया गया।
प्रशासन से आर्थिक सहायता के लिए 50-50 हजार रुपये की मांग
दीपक बैज ने प्रशासन से मांग की है कि जिन्होंने बाढ़ में अपना घर, खेती, पशुधन, सामान और जीवनभर की कमाई खो दी है, उन्हें तुरंत राहत दी जाए,उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को तत्काल 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही नुकसान का आंकलन कर आगे और मुआवजा भी प्रदान किया जाए।
बैज ने डीएमएफ फंड पर सवाल उठाया
दंतेवाड़ा जिले में लगभग 1000 करोड़ रुपए का डीएमएफ फंड मिलता है, इसके बावजूद बाढ़ प्रभावितों को बेहद खराब और नाममात्र की राहत सामग्री दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना बड़ा फंड आखिर कहां पर खर्च हो रहा है।
प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करे
प्रशासन को बस्तर के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, बाढ़ आपदा कुछ गांवों को नहीं पूरे बस्तर संभाग को प्रभावित कर रही है। बैज ने कहा कि सिर्फ राहत सामग्री या छोटे राशन पैकेट बांटने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि एक व्यापक योजना जरूरी है, बाढ़ में कई पुल-पुलिए और सड़कें बह गई हैं, जिससे कई गांव मुख्य सड़कों से कट गई हैं, जिससे एक गांव से दूसरे गांव जाने पर कठिनाईयां हो रही हैं, प्रशासन को तुरंत पुल पुलियों की पुनर्निर्माण शुरू करना चाहिए।

