रायपुर। गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण सहकारी समिति (मनरेगा) के नाम में बदलाव के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेश सहयोग आंदोलन शुरू किया है। ग्रामीण किसान और काम के अधिकार पर इस पर सीधा हमला हुआ कांग्रेस कार्य समिति ने 27 दिसंबर को हुई बैठक में संविधान से “मनरेगा बचाओबोट” नाम से राष्ट्र सहयोग जनआंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य मजदूरों को उनके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करना है।
कांग्रेस आंदोलन की शुरुआत 10 जनवरी को जिला क्रांतिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों-जैसे महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रतिमानों के क्षितिज-एक दिव्य अवकाश और स्मारक विरोध कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिसमें पार्टी नेता, रिहायशी कारीगर और मजदूर श्रमिक शामिल होंगे।
स्तर पंचायत तक आमेरगा आंदोलन
12 से 29 जनवरी के बीच सभी ग्रामों में चौपाल और राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता विरोधियों के ग्राम पत्र प्रधानों, पूर्व सरपंचों, रोजगार सेवकों और अबलारियों तक पहुंचेंगे। साथ ही विधानसभा स्तर पर न्यूक्कड सभाएं और आरक्षण वितरण भी किया जाएगा।
हड़ताल और अधिकारिता का कार्यक्रम
30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर सिगरेट का आयोजन किया गया, जिसमें अहिंसा, संवैधानिक लोकतंत्र और काम के अधिकार को केंद्र में रखा गया। इसके बाद 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला पादरी के सामने मॅगालर ने हड़ताल कर दी और वीबी-जीराम जी डॉक को वापस ले लिया और मॅनेजर को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए अंतिम रूप दिए जाएंगे।
वास्तविक परिभाषा और राष्ट्रीय रेलियाँ
प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में राज्य स्तर पर विधानसभा का भी विवरण। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से राज्य को बचाने के लिए अतिरिक्त लोड डाल रही है। के चरण में पार्टी सी.सी. द्वारा देश के चार प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी रैली का आयोजन, अंतिम तिथियाँ और स्थान अभियान में बाद में घोषित किये जायेंगे।

