अंतरजिला स्थानांतरण से वरिष्ठता नहीं घटेगी: शिक्षक एलबी मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

रायपुर। शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण और वरिष्ठता को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के आधार पर किसी शिक्षक की वरिष्ठता घटाई नहीं जा सकती और ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है।मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी कर्मचारी या शिक्षक का अंतरजिला स्थानांतरण होने पर उसकी वरिष्ठता में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण पर हाई कोर्ट का  फैसला

छत्तीसगढ़ में शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण और वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी शिक्षक के स्थानांतरण के बाद उसकी वरिष्ठता में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले को शिक्षक हित में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है और वह वहां जाकर ज्वाइन करता है, तो उसकी सेवा सभी प्रयोजनों के लिए निरंतर मानी जाएगी। केवल नई जगह पर पदस्थापना के आधार पर यह घोषित नहीं किया जा सकता कि वह कर्मचारी या शिक्षक जूनियर हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस आशय का कोई परिपत्र या आदेश जारी किया गया है, तो वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन होगा।

स्थानांतरण से वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यदि किसी कर्मचारी या शिक्षक को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित किया जाता है और वह वहां जाकर ज्वाइन करता है, तो उसकी सेवा सभी प्रयोजनों के लिए एकसमान मानी जाएगी। केवल नई जगह पर पदस्थापना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वह शिक्षक जूनियर हो गया है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकार का कोई परिपत्र या आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता घटाई जाती है, तो वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन होगा।

याचिकाकर्ता शिक्षकों को पदोन्नति का आदेश

हाई कोर्ट ने शिक्षक एलबी की याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता शिक्षकों को ग्रेडेशन लिस्ट में उचित वरिष्ठता प्रदान की जाए और उन्हें प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नत किया जाए।यह मामला स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी की गई ग्रेडेशन सूची से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता शिक्षकों को उनके जूनियर्स के नीचे हेड मास्टर (प्राइमरी स्कूल) कैडर में दर्शाया गया था। इसी कारण उन्हें हेड मास्टर, प्री-मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति से बाहर कर दिया गया था।

ओंकार प्रसाद वर्मा मामला बना प्रमुख याचिका

इन सभी मामलों में ओंकार प्रसाद वर्मा एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य को प्रमुख याचिका के रूप में लिया गया। याचिकाकर्ताओं की मांग लगभग एक जैसी थी। उन्होंने शिक्षक ई कैडर और प्रधान पाठक, प्राथमिक विद्यालय की वरिष्ठता सूची को पुनः तैयार करने तथा उसके आधार पर प्रधान पाठक, मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति की मांग की थी।दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी की गई ग्रेडेशन सूची में याचिकाकर्ता शिक्षकों को उनके जूनियर्स के नीचे हेड मास्टर (प्राइमरी स्कूल) के कैडर में रखा गया था। इसके कारण उन्हें हेड मास्टर, प्री-मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

2010 की नियुक्ति से वरिष्ठता देने की मांग

याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अदालत को बताया कि उन्हें 10 दिसंबर 2010 को प्रधान पाठक, प्राथमिक विद्यालय के पद पर नियुक्त किया गया था। डीपीआई द्वारा उन्हें उसी समय हेड मास्टर प्राइमरी स्कूल के पद पर पदस्थ किया गया था। इसलिए उनकी वरिष्ठता भी नियुक्ति की मूल तिथि यानी 10 दिसंबर 2010 से मानी जानी चाहिए।

स्वेच्छा से कराया था अंतरजिला स्थानांतरण

याचिकाकर्ता शिक्षकों ने परिवार और स्वास्थ्य कारणों से अपने स्वयं के अनुरोध पर प्रारंभिक जिला बलौदाबाजार-भाटापारा से रायपुर जिले में स्थानांतरण कराया था। दोनों जिले रायपुर संभाग के अंतर्गत आते हैं और एक ही डीपीआई डिवीजन द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों को देखता है।

गलत तरीके से तैयार की गई ग्रेडेशन सूची

12 मार्च 2021 को शिक्षकों ने अपने संघ के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद 16 मार्च 2021 को संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की गई, लेकिन इसमें भी याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी नियुक्ति की मूल तिथि के बजाय स्थानांतरण की तिथि से गिनी गई। इसी आदेश को शिक्षकों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि तैयार की गई ग्रेडेशन सूची कानून के विरुद्ध है और इससे कुछ शिक्षकों को अनुचित लाभ तथा याचिकाकर्ताओं को नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि जिला परिवर्तन के आधार पर किसी शिक्षक को जूनियर घोषित करना असंवैधानिक है।हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता शिक्षकों को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षक एलबी के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल भी साबित होगा। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अंतरजिला स्थानांतरण के नाम पर वरिष्ठता और पदोन्नति से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

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