व्यापारियों के पक्ष में हाईकोर्ट का अहम फैसला

बिलासपुर। बिलासपुर के बृहस्पति बाजार को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जहां से व्यापारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बृहस्पति बाजार में वर्षों से सब्जी व्यवसाय कर रहे करीब 450 व्यापारियों के विस्थापन पर रोक लगा दी है। यह फैसला नगर निगम द्वारा जारी किए गए नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया।

दरअसल, नगर निगम बिलासपुर ने बृहस्पति बाजार क्षेत्र में 13 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक मल्टी लेवल सब्जी बाजार और कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत मौजूदा सब्जी बाजार को हटाकर नया निर्माण किया जाना है। इसी क्रम में निगम की ओर से व्यापारियों को 7 दिन के भीतर दुकानें खाली करने का नोटिस जारी किया गया था।

नोटिस मिलने के बाद व्यापारियों में हड़कंप मच गया। वर्षों से यहां व्यापार कर रहे छोटे–मोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अचानक उजाड़ने की तैयारी की जा रही है, जबकि उनके पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना सामने नहीं रखी गई। व्यापारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान व्यापारियों की ओर से दलील दी गई कि निगम ने नोटिस जारी करते समय नियमों का पालन नहीं किया। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के, बेहद कम समय में दुकान खाली करने का आदेश दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए माना कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन हुआ है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक व्यापारियों के लिए वैकल्पिक स्थान की ठोस और लिखित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उन्हें विस्थापित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 450 सब्जी व्यापारियों के विस्थापन पर अंतरिम स्टे लगा दिया। स्टे आदेश के बाद नगर निगम फिलहाल किसी भी व्यापारी को हटाने की कार्रवाई नहीं कर सकेगा।

व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि “पहले विस्थापन, फिर निर्माण” का सिद्धांत अपनाया जाए। उनका कहना है कि जब तक उन्हें दूसरी जगह व्यवस्थित दुकानें नहीं दी जातीं, तब तक उन्हें उजाड़ना गलत है।व्यापारियों ने यह भी मांग रखी कि जब नया मल्टी लेवल कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार हो, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उसी स्थान पर दुकानें आवंटित की जाएं, जहां वे वर्षों से व्यापार करते आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए।

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