ED की बड़ी कार्रवाई: Mahadev Satta App और Skyexchange के संचालकों की 91.82 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किया है, जिसमें महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और Skyexchange.com के “अवैध सट्टेबाजी संचालन” के मामले में कुल 91.82 करोड़ रुपये (लगभग) की चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है।

इस कार्रवाई में ED ने मिस परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और M/s एक्जिम जनरल ट्रेडिंग-GZCO के नाम पर रखे गए कुल 74,28,87,483/- रुपये के बैंक बैलेंस को अटैच किया है। ये संस्थाएं सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं और इनका इस्तेमाल उन्होंने अपराध की कमाई (PoC) को बेदाग निवेश के रूप में छिपाने और दिखाने के लिए किया था। इसके अलावा हरि शंकर टिबरेवाल (Skyexchange.com के मालिक) के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। अटैच की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें कैश (PoC) से खरीदा गया था।

ED की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने बड़ी मात्रा में PoC जेनरेट किया, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से लॉन्डर किया गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य लोगों ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया। महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों या मोबाइल एप्लिकेशन (APPs) को ग्राहक हासिल करने और इन अवैध सट्टेबाजी खेलों/वेबसाइटों के लिए वित्तीय संचालन का ध्यान रखने की सुविधा देने के लिए बनाया गया था।

हालांकि, इस प्रक्रिया में, वेबसाइटों को इस तरह से हेरफेर किया गया था कि सभी ग्राहकों को अंततः पैसे का नुकसान हो। हजारों करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा किया गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक खाते खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी की कमाई को उनके स्रोत को छिपाने के लिए लेयर किया गया। इन सभी लेनदेन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स के दायरे में लाया गया।

जांच में आगे पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किए गए और बाद में उन्हें वापस लाकर विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय शेयर बाज़ार में इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक जटिल “कैशबैक” स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था। गगन गुप्ता को M/s Salasar Techno Engineering Ltd. और M/s Tiger Logistics Ltd. जैसी कंपनियों से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपये (PoC) का लाभार्थी पाया गया है।

अब तक, ED ने इस मामले में 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। चल रही जांच के परिणामस्वरूप, लगभग 2,600 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच की गई है।

इसके अलावा ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन शिकायतों में 74 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

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