रायपुर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में सामाजिक सद्भाव बैठक, एकता और समरसता का दिया संदेश

रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में गुरुवार को रायपुर स्थित श्रीराम मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथों के 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर सरसंघचालक ने सामाजिक एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान पर विस्तार से विचार रखे।

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की विशेषता यह है कि यहां लोग अपनी-अपनी आस्था और आचरण के साथ सद्भावपूर्वक रहते आए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे समाज में घर में काम करने वाले व्यक्ति को भी परिवार का सदस्य मानकर सम्मान दिया जाता है, यही परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज स्वेच्छा से भारत नहीं गए, बल्कि देशवासियों की एकजुटता और संघर्ष के कारण उन्हें जाना पड़ा। हालांकि, हमारी एकता को तोड़ने के प्रयास भी किए गए, लेकिन समाज ने समय-समय पर उन्हें विफल किया है।

सरसंघचालक ने कहा कि विविधता के बावजूद भारत की अस्मिता एक है। सभी जाति, पंथ और समाज मिलकर राष्ट्र का निर्माण करते हैं। जहां संगठन और सद्भावना मजबूत होती है, वहां विभाजनकारी शक्तियां सफल नहीं हो पातीं। उन्होंने लव जिहाद, मतांतरण और व्यसन जैसी सामाजिक चुनौतियों पर जागरूकता और प्रबोधन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समाज के दुर्बल और वंचित वर्ग के सशक्तिकरण के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने सामाजिक जीवन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इसमें परिवार के भीतर साप्ताहिक संवाद, सामूहिक भोजन और भजन, पूर्वजों व संस्कारों पर चर्चा, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव, प्लास्टिक के कम उपयोग और वृक्षारोपण जैसे विषय शामिल थे। उन्होंने मातृभाषा के प्रयोग, भारतीय वेशभूषा, अपने आदर्शों और महापुरुषों के सम्मान तथा संविधान, नागरिक कर्तव्यों और सामाजिक मूल्यों की जानकारी को भी आवश्यक बताया।

सर्व समाज के साथ पंगत में किया भोजन

इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विभिन्न जाति, पंथ और समाज के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में बैठकर भोजन किया, जिससे सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।

सेवा कार्यों के अनुभव साझा

बैठक के दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक और सेवा कार्यों के प्रेरक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की प्रस्तावना मध्यक्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने रखी, जबकि प्रांत संघचालक टोपलाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *