बसंत पंचमी पर क्यों खास होती है केसरिया भात और खिचड़ी? जानिए पीले रंग का धार्मिक व आयुर्वेदिक महत्व

बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि इसे ऋतुओं के राजा वसंत के आगमन का पर्व माना जाता है. इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. यह त्योहार प्रकृति के रंगों से भी जुड़ा है. बसंत पंचमी पर हर तरफ पीला रंग दिखाई देता है, चाहे कपड़े हों, फूल हों या भोजन. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन थाली में केसरिया भात और खिचड़ी का होना क्यों जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं.

पीले रंग का महत्व

वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. इस समय सरसों के खेत लहलहाते हैं, पलाश और टेसू के फूल खिलते हैं और प्रकृति पीले रंग में रंग जाती है.

पीला रंग उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. इसे ज्ञान और बुद्धि से जोड़ा जाता है. यह मां सरस्वती का प्रिय रंग है. इसी कारण बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले भोजन का विशेष महत्व होता है.

केसरिया भात क्यों होता है खास

केसरिया भात या मीठा पीला चावल केसर या हल्दी से बनाया जाता है. यह शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना जाता है. आयुर्वेद में केसर को सात्विक और तेज बढ़ाने वाला बताया गया है. केसरिया भात मां सरस्वती को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है, ताकि ज्ञान, स्मरण शक्ति और विवेक में वृद्धि हो.

खिचड़ी का धार्मिक और स्वास्थ्य महत्व

बसंत पंचमी पर बनाई जाने वाली पीली खिचड़ी दाल और चावल का संतुलित मिश्रण होती है. यह ऋतु परिवर्तन के समय पाचन तंत्र को मजबूत रखती है. हल्दी के कारण इसमें रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं. धार्मिक रूप से खिचड़ी को सरलता, सात्विकता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

आयुर्वेद से जुड़ा संबंध

वसंत ऋतु में शरीर में कफ दोष बढ़ने लगता है. पीले रंग के, हल्के और गर्म तासीर वाले भोजन कफ को संतुलित करते हैं. ये शरीर को आलस्य से बाहर निकालते हैं और नई ऊर्जा का संचार करते हैं.

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